आज सोचता हूँ मैं
कुछ राज़ तुमसे कहे...
जो हमने महसूस की है,
वोह बात तुमसे कहें...
ख़ामोशी में जो ले आई
मुश्कान होठो पर....
कुछ ऐसे हैं वोह राज़
जो हम आज तुमसे कहें...!!!
क्या तुमको पता है ये,
तुम हर रोज़ मेरे ख़्वाबो में आती हो...
मैं सोता हूँ बच्चो सा और,
तुम मेरे माथे को सहलाती हो....
मैं नींद में उठ कर
घंटो तुमसे ढेरो बातें करता हूँ....
तुम बैठ कर मुस्कुराती हो
और मैं बकबक करता हूँ...
तुम ख़ामोशी से अपने हाथ
मेरे
गालो पर रखती हो...
उस बकबक में
मेरी ढलती ख़ामोशी की है बात...
जो आज हम तुमसे कहें.....!!!!!
मैं हर मुस्कुराते चेहरे में
तुम्हारा चेहरा तलाश करता हूँ...
भीड़ के उस बेगानेपन में
मैं तुमको तलाश करता हूँ...
तुम्हारी हर पसंद की चीज़ पर
अब मैं भी गौर करने लगा हूँ...
टिंडे और शिमला मिर्च से जैसे
मैं भी नफरत करने लगा हूँ...
उन् अंजानो में किसी अपने को
धुन्धने की है वोह बात...
जो आज हम तुमसे कहें....!!!
मगर एक खलिश मुझे तडपती है...
मुझे अंदर तक झकझोर जाती है..
कई बार कई सवाल मैं...
खुद से ही करता रहता हूँ..
क्या मैं सच में काबिल हूँ इसका...
जिसपर मैं हक समझता रहता हूँ...
बस कुछ ऐसे सवाल मेरे मन में उठते है....
क्या यह पल हरदम रहेंगे ऐसे ही मेरे संग....
इन सवाल जवाब में उठते...
शुभम् के प्रीत की है वोह बात....
जो आज हम तुमसे कहें....!!!
कृति : विष्णु मणि पाण्डेय (शुभम्)

Kya baat hai Bhai!! Chha gaye..gum ho aajkal fir bhi yahan ki maujudgi sabse zyada behatareen hai! Bahut khub..ek baat to hai tumhari writings bahut masum n dil ko chhoo leti hai! Keep writing bro!
ReplyDeletethanks bro..:) bas kuch busy schedule mein thoda sa waqt nikal liya.. :)
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