Monday, 6 January 2014

दूर सही...



सफ़र है  यह कट ही जायेगा ....
लम्हा लम्हा हर ज़ख्म भर  ही जायेगा ....
परिंदा जो किसी कारण से आशियाँ छोड़ गया .....
शाम ढलने पर वोह भी लौट आएगा .....
जिद्द में किसी की  तामुँर  इंतज़ार करना ....
बिना बात हर पल उसके यादो में रहना ....
खुश रहो तुम खुद की प्यारी दुनिया में ...
देखना बेवाफाई का मलाल उससे भी ज़रूर होगा ...
दूर सही मगर उसे अब  भी मुझसे प्यार होगा .....!!!!!

जहाँ बातों  में  प्यारी यादें कुरेदता होगा ....
किसी को देख वोह भी मुझे सोचता होगा ...
कई  बार उलझन में मुझे पुकारता होगा ...
खामोश चेहरे से मुझे आज भी निहारता होगा ....
लेके कई सवाल दिल में वोह चुप सा ...
दोस्तों को देख ज़रूर मुस्कुराता होगा ..
मेरी जैसी बातों में  उसका भाव भड़कता होगा ...
मोहब्बत की बात पे उसका हृदय धड़कता जाता होगा ...
दूर सही मगर उसे अब  भी मुझसे प्यार होगा .....!!!!!

मेरी तरह देर तलक वोह भी जगता होगा ...
अँधेरी रातों में छत पे कुछ तोह तकता होगा ...
खामोश रातो में अश्को से तकिया भिगोता होगा ...
चुपके से खुद में सिमट के वोह भी सोता होगा ...
खाव्बों में उसके शायद आज भी मेरा ही एहसास होगा ...
सुबह उठकर वोह भी मुझे ढूंढता होगा ...
शुभम इस बात का उसे भी कुछ एहसास होगा ...
दूर सही मगर उसे अब भी मुझसे प्यार होगा ....!!!!

कृति : विष्णु मणि पाण्डेय ( शुभम्)

1 comment:

  1. भावपूर्ण अभिव्क्ती शुभम जी !

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