Wednesday, 6 March 2013

यादों के पन्ने

आज यादों के पन्ने पलट  मैं रोता रहा
कुछ मीठी पुरानी बातों को दिल में संजोता रहा
वोह बातें जो कभी खूब हंसाया करती थी
उन् बातों पे मैं आज देर तलक रोता रहा
उस वक़्त जो नम्म कर गई थी आँखें मेरी
उन बातों पे आज ख़ुशी मैं डुबोता रहा
आज यादों के पन्ने  पलट मैं रोता रहा ....!!!!

क्या वोह भी मुझे ऐसे ही याद करते होंगे
जो यार कभी महफ़िल में रक्स किया करते थे
क्या वोह बातें उनको भी याद आती होंगी
जिनपर देर तक हम खूब झगड़ते रहते  थे
वोह एक रोटी के कितने टुकडो मे बंटना
दोस्तों की चीजों पे अपना हक समझना
दोस्त की बात सच बाकी सबकी गलत समझना
वोह भोलेपन में दुनिया जीत लेने का शौख
कुछ ऐसी ही बातों में देर तक घूमता रहा
आज यादों के पन्ने  पलट मैं रोता रहा ....!!!!

तब न था पता की यह दिन भी आएगा
वोह यादें, वोह बातें इतना दिल दुखायेंगी
ज़िन्दगी कुछ ऐसे पलट के आएगी
बिना बात यह खाली यादो में रुलाएगी
बीती उन् बातों को मैं देर तलक टटोलता रहा
बैठे-बैठे बेवजह बस देर तलक सोचता रहा
आज ..... उन् यादो के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!

कृति : विष्णु मणि पाण्डेय  (शुभम )