Thursday, 29 May 2014

कुछ मांगें..



एक बगिया से कुछ सपने चुने...
कुछ तुम्हारे कुछ अपने चुने..l
 
कुछ खुशबु बटोरी खुशियों की तुम्हारे लिए.. 
कुछ मीठी यादो के लम्हे अपने लिए बुने..l

मासूमियत उठाई है तुम्हारी, सुबह की ठंडी ओस से 
तेरे चेहरे की सादगी मिली रात की चांदनी से...l
बगिया की नर्म हवाओं से अपने लिए प्यार बटोरा है...
तेरी मुस्कराहट की दस्तक देता ये नया सवेरा है...l

सरसराती हुई पत्तियों से तेरी पायल की झनकार मांगी है 
इस नर्म एहसास में तेरी कुछ याद मांगी है..l
इन चिड़ियों की चहक से जीवन में साज़ माँगा है.
खिलती हुई कलियों से मैंने ये गहन-ऐ-ताज माँगा है 
आदतन पहने बैठा हूँ जो खुशियों का लिबास शुभम्...
बस उसी में साथी मैंने तेरा भी साथ माँगा है...l

कृति: विष्णु मणि पाण्डेय (शुभम्)