आज यादों के पन्ने पलट मैं रोता रहा
कुछ मीठी पुरानी बातों को दिल में संजोता रहा
वोह बातें जो कभी खूब हंसाया करती थी
उन् बातों पे मैं आज देर तलक रोता रहा
उस वक़्त जो नम्म कर गई थी आँखें मेरी
उन बातों पे आज ख़ुशी मैं डुबोता रहा
आज यादों के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!
क्या वोह भी मुझे ऐसे ही याद करते होंगे
जो यार कभी महफ़िल में रक्स किया करते थे
क्या वोह बातें उनको भी याद आती होंगी
जिनपर देर तक हम खूब झगड़ते रहते थे
वोह एक रोटी के कितने टुकडो मे बंटना
दोस्तों की चीजों पे अपना हक समझना
दोस्त की बात सच बाकी सबकी गलत समझना
वोह भोलेपन में दुनिया जीत लेने का शौख
कुछ ऐसी ही बातों में देर तक घूमता रहा
आज यादों के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!
तब न था पता की यह दिन भी आएगा
वोह यादें, वोह बातें इतना दिल दुखायेंगी
ज़िन्दगी कुछ ऐसे पलट के आएगी
बिना बात यह खाली यादो में रुलाएगी
बीती उन् बातों को मैं देर तलक टटोलता रहा
बैठे-बैठे बेवजह बस देर तलक सोचता रहा
आज ..... उन् यादो के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!
कृति : विष्णु मणि पाण्डेय (शुभम )

कुछ मीठी पुरानी बातों को दिल में संजोता रहा
वोह बातें जो कभी खूब हंसाया करती थी
उन् बातों पे मैं आज देर तलक रोता रहा
उस वक़्त जो नम्म कर गई थी आँखें मेरी
उन बातों पे आज ख़ुशी मैं डुबोता रहा
आज यादों के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!
क्या वोह भी मुझे ऐसे ही याद करते होंगे
जो यार कभी महफ़िल में रक्स किया करते थे
क्या वोह बातें उनको भी याद आती होंगी
जिनपर देर तक हम खूब झगड़ते रहते थे
वोह एक रोटी के कितने टुकडो मे बंटना
दोस्तों की चीजों पे अपना हक समझना
दोस्त की बात सच बाकी सबकी गलत समझना
वोह भोलेपन में दुनिया जीत लेने का शौख
कुछ ऐसी ही बातों में देर तक घूमता रहा
आज यादों के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!
तब न था पता की यह दिन भी आएगा
वोह यादें, वोह बातें इतना दिल दुखायेंगी
ज़िन्दगी कुछ ऐसे पलट के आएगी
बिना बात यह खाली यादो में रुलाएगी
बीती उन् बातों को मैं देर तलक टटोलता रहा
बैठे-बैठे बेवजह बस देर तलक सोचता रहा
आज ..... उन् यादो के पन्ने पलट मैं रोता रहा ....!!!!
कृति : विष्णु मणि पाण्डेय (शुभम )

बहुत खूब, शानदार रचना
ReplyDeleteशुक्रिया सर, आभार... :)
Deletevery nice kavita
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया मैडम...:)
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